Skanda Purāṇa · Vaiṣṇava-khaṇḍa
Puruṣottama-kṣetra-māhātmya · Chapter 1
SkP 2.1.104 · Śloka 104 of 105Devanāgarī
ऋषय ऊचुः। सूत त्वयोक्तं भुवि पर्वतेषु पुण्येषु पुण्यस्य महीधरस्य। माहात्म्यमस्माकमहीन्द्रनाम्नः पापापहं मोक्षफलप्रदायकम्
सन्धि-विच्छेद
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प्रत्येक शब्द का अर्थ
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अनुवाद
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भाष्य · टीका
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