Skanda Purāṇa · Vaiṣṇava-khaṇḍa
Puruṣottama-kṣetra-māhātmya · Chapter 1
SkP 2.1.82 · Śloka 82 of 105Devanāgarī
पुण्यान्यपि च वर्धंते देवतीर्थनिमज्जनात। दीर्घमायुरवाप्नोति पुत्रपौत्रसमन्वितः। अन्ते स्वर्गं समासाद्य चन्द्रलोके महीयते
सन्धि-विच्छेद
सन्धि-विच्छेद सम्पादकीय समीक्षा के बाद यहाँ प्रदर्शित किया जाएगा।
प्रत्येक शब्द का अर्थ
इस भाषा का अनुवाद तैयार किया जा रहा है।
अनुवाद
इस भाषा का अनुवाद तैयार किया जा रहा है।
भाष्य · टीका
नामित भाष्यकार और संस्करण-स्रोत के साथ भाष्य जोड़ा जाएगा।
