Skanda Purāṇa · Vaiṣṇava-khaṇḍa
Puruṣottama-kṣetra-māhātmya · Chapter 1
SkP 2.1.6 · Śloka 6 of 105Devanāgarī
ऋषय ऊचुः। रोमहर्षण सर्वज्ञ पुराणार्थविशारद। माहात्म्यं श्रोतुमिच्छामो गिरीन्द्राणां महीतले। ब्रूहि त्वं नो महाभाग के प्रधाना महीधराः
सन्धि-विच्छेद
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प्रत्येक शब्द का अर्थ
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अनुवाद
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भाष्य · टीका
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