Skanda Purāṇa · Vaiṣṇava-khaṇḍa
Puruṣottama-kṣetra-māhātmya · Chapter 1
SkP 2.1.58 · Śloka 58 of 105Devanāgarī
धरण्युवाच। षट् तीर्थानि महाबाहो त्वयोक्तानि महीधरे। माहात्म्यं वद तेषां मे यथाकालं यथाविधि। फलानि तेषु स्नातानां नराणां वद भूधर
सन्धि-विच्छेद
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प्रत्येक शब्द का अर्थ
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अनुवाद
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भाष्य · टीका
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