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Atharvaveda Śaunaka · Kāṇḍa 2 · Sūkta 17
sukta · sa-Deva
बलप्राप्तिः। १-७ ब्रह्मा। प्राणः, अपानः, आयुः। (एकावसानम्) १-६ एकपदासुरी त्रिष्टुप्, ७ आसुरी उष्णिक्। ओजो॒ऽस्योजो॑ मे दाः॒ स्वाहा॑ ।१॥ सहो॑ऽसि॒ सहो॑ मे दाः स्वाहा॑ ॥२॥ बल॑मसि॒ बलं॑ मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥३॥ आयु॑र॒स्यायु॑र्मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥४॥ श्रोत्र॑मसि॒ श्रोत्रं॑ मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥५॥ चक्षु॑रसि॒ चक्षु॑र्मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥६॥ प॒रि॒पाण॑मसि परि॒पाणं॑ मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥७॥
